ब्रिटिश भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई, जिनको पारिवारिक दबाव के कारण मात्र 9 वर्ष की आयु में शादी करनी पड़ी। विस्तार से जानें

आज 8 मार्च विश्व महीला दिवस है, जिस पर हम महिलाओं के योगदान को याद करते हैं। उनको आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देते। आज हम विश्व महीला दिवस के दिन भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई गोपालराव जोशी के बारे में जानेंगे।

आनंदीबाई गोपालराव जोशी को भारत की पहली महिला डॉक्टर के रूप में जाना जाता है। क्योंकि वह ऐसी पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने पहली बार पश्चिमी चिकित्सा पद्धति से बनी डॉक्टर थीं।

उन्होंने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई संयुक्त राज्य अमेरिका में दो साल तक वहां रह कर पूरी की थीं।, वह डॉक्टरी में स्नातक करने वाली तात्कालिक भारत की बॉम्बे प्रेसीडेंसी की पहली महिला थीं।

आनंदीबाई गोपालराव जोशी का जीवन

•आनंदीबाई का जन्म  31 मार्च 1865 कल्याण , बॉम्बे प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत में हुआ था। 

•उनका बचपन का नाम यमुना है, जोकि उनके माता पिता ने जन्म के समय रखा था।

•उनके पिता गणपतराव  और माता अमृतेश्वर जोशी थीं,वे दोनों एक मराठी चितपावन ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे।

•माता पिता के दबाव के कारण उनकी 9 वर्ष की आयु में विधुर गोपालराव जोशी शादी हो गई थी। गोपालराव जोशी पेशे से कल्याण में एक डाक क्लर्क थे। 

•आनंदीबाई मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही मां बन गई और उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया। हालाकि लड़का बिना चिकित्सा देख रेख के कारण कुल 10 दिन ही जीवित रहा था। यही से उनके जीवन में अहम पढ़ावआया और उन्होंने डॉक्टर बनने के लिए कदम आगे बढ़ाया।

•आनंदीबाई की मृत्यु 26 फरबरी 1887 पुणे , बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में मात्र 21 वर्ष की आयु में हो गई थी। उनको तपेदिक की बीमारी हो गई थी, डॉक्टर्स ने उन्हे बचाने की बहुत कोशिश की। लेकिन वह बच न सकीं।

आनंदीबाई
जन्म 31 मार्च 1865 कल्याण , बॉम्बे प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत
बचपन का नाम यमुना जोशी
पति गोपालराव जोशी
शादी की उम्र मात्र 9 वर्ष की आयु में
पहली बार मां बनी मात्र 14 वर्ष की उम्र में
पिता और मां गणपतराव और अमृतेश्वर जोशी
मृत्यु 26 फरवरी 1887 (उम्र 21) पुणे , बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
मृत्यु का कारण तपेदिक रोग
पहली बार मां बनी मात्र 14 वर्ष की उम्र में
मृत्यु के बाद अस्थियां पॉफकीप्सी कब्रिस्तान, न्यूयॉर्क , संयुक्त राज्य अमेरिका ( राख )
पहली संतान लड़का, जो मात्र 10 दिन ही जीवित रहा

शिक्षा ग्रहण

उनके पति गोपालराव जोशी ने उनका पढ़ाई के लिए प्रवेश  ईसाई मिशनरी स्कूल में कराने की कोशिश की। लेकिन वह विफल रहे। इसके बाद वह उन्हें कोलकाता ले गए। जहां आनंदीबाई ने संस्कृत और अंग्रेजी बोलना सीखा।

•उन्होंने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई अल्मा मेटर पेंसिल्वेनिया अमेरिका से की थी। 

मुख्य भाषाएं संस्कृत और अंग्रेजी
डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की स्नातक पेंसिल्वेनिया के महिला मेडिकल कॉलेज
स्नातक कोर्स 2 वर्ष
सेवा कार्य ब्रिटिश भारत में

आनंदीबाई के बारे में अन्य तथ्य

आनंदीबाई की जीवनी अमेरिकी नारीवादी लेखिका कैरोलिन वेल्स हीली डेल ने सन् 1888 में लिखीं।

• गूगल ने 31 मार्च 2018 को, उनकी 153वीं जयंती स्मरण करने के लिए उन्हें Google डूडल से सम्मानित किया।

• वह भारत में पहली महिला डॉक्टर के नाम से विख्यात हैं।

• वह एक हिन्दू थीं, मौत के बाद उनकी राख को पॉफकीप्सी कब्रिस्तान , न्यूयॉर्क , संयुक्त राज्य अमेरिका में रखा गया।

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