भारतीय रूपए के सामने रूसी रूबल कहां खड़ा है, रूस में बैंको के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी, लोगों को पैसा डूबने का खौफ

इस समय रूस और यूक्रेन के बीच महाविनाशक युद्ध चल रहा है, जिसमें रूस की विनाशक मिसाइल्स यूक्रेन पर कहर बरपा रही हैं। यूक्रेनी शहर और वहां के लोगों के घर रूसी हमलों में बर्बाद हो रहे।

रूस में बैंको के बाहर लगीं भीड़

इसी बीच यूक्रेन पर रूसी हमले के जवाब में अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं और दूसरे देश भी यूरोपीय देशों का अनुसरण कर रहे हैं। जिनमें जापान, आस्ट्रेलिया , स्वीडन, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं। 

पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधो का असर रूस पर दिखना शुरू हो गया है। आज रूस की मुद्रा 1 अमेरिकी डॉलर की तुलना में 105 रूबल तक गिर गई थी। लेकिन बाद में 95 रूबल पर जाकर ठहरी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद, रूसी मुद्रा रूबल रिकॉर्ड 30% तक लुढ़क गई। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है।

वर्तमान में रूसी रूबल डॉलर के मुकाबले

अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूबल की मांग में कमी

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी मुद्रा रूबल की मांग में बड़ी तेज़ी से गिरावट आई है। कोई भी रूबल को लेने में आर्कषित नहीं हो रहा है। जिस वजह से रूबल रिकॉर्ड स्तर से नीचे गिरता जा रहा है। अभी तो बस शुरुआत है। अगर रूस के ऊपर से पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटते हैं। तो रूसी रूबल डॉलर की तुलना में 150 से 200 तक लुढ़क जाए।

आज भारतीय मुद्रा रूपए की तुलना में रूसी रबल 1.25 तक लुढ़क गया है। अर्थात आज भारतीय मुद्रा रूपए की कीमत रूबल से ज्यादा हो गई है। 10,000 भारतीय रूपए के बदले में 12000 रूसी रूबल प्राप्त हो सकतें हैं।

रूस की केंद्रीय बैंक ने डॉलर की तुलना में रूसी मुद्रा की गिरावट से  सचेत हो गई है। इसी के चलते केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को 9.25% से बढ़ाकर 20% तक कर दिया है। ताकि रूस में बैंको और अर्थव्यवथा को बचाया जा सके। 

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के डर से रूसी नागरिकों में अफरातरी मची हुई है। उनको डर सता रहा है कि कहीं उनका बैंको में रखा धन डूब न जाए। इसी के चलते रूस में बैंको के बाहर लोगों की लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। लोग अपना पैसा निकालकर घर पर रखना चाहते हैं। ताकि उनका पैसा डूबने से बच सकें। क्योंकि सोवियत संघ के जमाने में भी बहुत सारे बैंक डूब गए थे।  जिससे लोग अपना पैसा खो बैठे थे। अब तो रूस में बेलगाम मुद्रास्फीति  बढ़ रही है, जिससे रूस में खाने पीने की वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी दर्ज़ की जा रही है और इन सबसे रूसी आम जनता का सामना हो रहा है। 

रूस में बैंको के बाहर लगी लंबी कतारें


रूस में तात्कालिक आर्थिक संकट का कारण

रूस को पश्चिमी देशों ने स्विफ्ट सिस्टम से बाहर कर दिया है, जिससे रूस की बैंक विदेशों में डॉलर में  लेनदेन नहीं कर सकती हैं। हालाकि इसका सीधा असर अभी नहीं पड़ा है। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस की प्रमुख बैंको पर स्विफ्ट सिस्टम से अलग करवाई की है। जिसमे रूस की Sberbank और वीटीबी बैंक शामिल हैं।

अमेरीका ने रूस की सबसे बड़ी बैंक Sberbank और अमेरीकी वित्तीय प्रणाली से 25 सहायक कंपनियों अलग कर दिया है। जिसमें Sberbank की अमेरीकी डॉलर तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया गया। यह बैंक रूस में 1/3 भाग के बैंकिंग क्षेत्र को नियंत्रित करती है। इसके अलावा यह विश्व के बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से अधिक जुड़ा हुआ बैंक ही है।

Sberbank के अलावा, वीटीबी बैंक पर भी अमेरिका और ब्रिटेन ने आर्थिक कार्यवाई की है। यह रूस की दूसरी सबसे बड़ी बैंक है। यूएस तथा यूके के पास इसकी संपत्तियां जमा हैं। इन दोनों देशों ने इन बैंको की संपतियों को फ्रीज कर दिया है। जिससे रूस का कोई भी नागरिक विदेश में व्यापार नहीं कर पायेगा। 

रूस में पुतिन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध शुरु किया। लेकिन उनकी जनता ही उनके निर्णय के खिलाफ़ खड़ी हो गई है। रूस की राजधानी मास्को में यूक्रेन युद्ध विरोधी 2000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह सिर्फ़ मास्को तक सीमित नहीं है। इसकी लपट रूस के कई शहरों तक पहुंच चुकी है। अभी तक रूस में कुल 55,00 युद्ध विरोधी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और उनको जेल में डाल दिया गया।

रूस पर अमेरिका और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का उद्देश्य

अमेरीका और पश्चिमी देश रूस पर यूक्रेन युद्ध के बाद प्रतिबंधों की झड़ी लगा रहें हैं। उनका सीधा उद्देश्य है कि रूसी आम जनता को आर्थिक प्रतिबंधों से प्रभावित किया जाए। क्योंकि जब रूस में महंगाई बढ़ेगी तो यहीं रूसी जनता पुतिन के ख़िलाफ़ सड़को पर उतर आयेगी। जिससे राष्ट्रपति पुतिन के लिए समस्याएं पैदा होती जायेगी। 

इसके अलावा यूरोपीय देशों ने रूसी अमीर लोगों के लिए गोल्डन पास्पोर्ट की सुविधा बंद कर दी है। जिससे अब ये लोग रूस से बाहर नहीं निकल सकतें है। ये लोग भी पुतिन के ख़िलाफ़ धीरे धीरे खड़े हो सकतें हैं। इसके अलावा रूस का मध्यम वर्ग भी पुतिन विरोधी रुख अपना सकता है। अगर रूस में बड़े पैमाने पर जनता ने पुतिन विरोधी रुख अपनाया। तो पुतिन को एक बार शक्ति के दम से प्रदर्शनों को कुचलना होगा। 

यहीं कारण है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यूक्रेन युद्ध से किसी तरह निकल जाना चाहते हैं। क्योंकि जैसे जैसे यह युद्ध आगे खिंच रहा था। रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगते जा रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी रूस के लिए कम होता जा रहा और यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ता जा रहा। बढ़ते आर्थिक प्रतिबंध रूस के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकतें हैं। क्योंकि रूसी जनता को उत्तरी कोरिया और ईरान की तरह अकेले में जीने की आदत नहीं है। दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देश रूस के लोगों के लिए अपने दरवाजे बंद कर रहें हैं।

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