भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर, अमेरीका में भारत को सजा देने की मांग उठने लगीं

अमेरिकी लोग आज भी सोच रहें हैं कि वो अभी भी दुनिया के दादा हैं और उनको सभी देशों को डिक्टेट करने का हक है। ऐसा ही कुछ अमेरीका में भारत को लेकर चल रहा है। दरअसल अमेरिकी भारत को लेकर हताश हैं। क्योंकि भारत जापान, यूरोपीय देशों और ऑस्ट्रेलिया की तरह अमेरिकी की साइड नही ले रहा है। वह यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार नहीं ठह रहा है। उनको भारत का निरपेक्ष रहना भी परेशान कर रहा है। अमेरिकी लोगों की बातों को  पढ़ा जाए तो यह साफ तौर पर झलक रहा है कि भारत पूरी तरह से रूस के बजाय पूरी तरह से अमेरिका का साथ दे। 


अब अमेरिकी पत्रकार और दूसरे लोग भारत को लेकर इतना ज्यादा हताश क्यों हैं? दरअसल पूरी दुनिया में तेल के दाम बढ़ते ही जा रहें हैं और भारत के लिए अधिक महंगा तेल देश की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। दूसरी तरफ महंगा तेल देश में मंहगाई भी बढ़ा देगा। जिससे भारतीय लोगों की मुसीबतें बढ़ जायेगी। अगर भारतियों की महंगाई से मुसीबतें बढ़ती हैं तो सरकार की परेशानियां अपने आप बढ़ जायेंगी। 

अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम 130 डॉलर प्रति बैरल के करीब हैं। जोकि बहुत अधिक हैं। जबकी दूसरी तरफ रूस ने भारत को 25 से 30% सस्ता तेल बेचने का ऐलान किया और इसके लिए भारत को एक प्रस्ताव भी भेजा गया। इस प्रस्ताव पर भारत सरकार ने अप्रत्यक्ष तौर पर स्वीकार भी कर लिया। भारत की सबसे बड़ी तेल शोधनशाला इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने रूस से 3 लाख बैरल तेल ख़रीद का आदेश जारी कर दिया है। जबकि भारत रूस से मात्र 1 से 2% ही तेल आयात करता है। भारत अपना 80 से 85% तेल आयात सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और नाइजीरिया जैसे देशों से करता है। लेकिन तेल के बढ़ते दामों ने भारत सरकार को सोचने पर विवश कर दिया।

तेल के मोर्चे पर जोए बाइडेन की अक्षमता

जोए बाइडेन और उनके लोग भारत को रूस से तेल आयात न करने के लिए कह रहें हैं। लेकिन क्या आप जानते हों कि विश्व में तेल के बढ़ते दामों के लिए जोए बाइडेन और अमेरीका ही जिम्मेदार हैं। अमेरीका ने भारत और अपने दूसरे सहयोगी देशों को ईरान और वेनेजुएला से तेल न खरीदने के लिए दबाव बनाया। इस बात भारत सहित दूसरे सहयोगी देश भी मान गए। लेकिन अब अमेरीका रूस से भी तेल न खरीदने के लिए कह रहा है। जबकि अमेरीका ने ईरान या वेनेजुएला तेल उत्पादक देशों से अभी भी संबंध नही सुधारे हैं। दूसरी तरफ बाइडेन ने ट्रंप की तेल नीति को पलट दिया। अपने देश के तेल उत्पादन को कम कर दिया। जिससे भारत जैसे देशों को नुकसान उठाना पड़ा। 

इन्हीं सब बातों को लेकर अमेरिकी सांसद और पत्रकार भारत को आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी दे रहें हैं। वो कह रहें हैं कि अगर भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता है, भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंध लगाएं जानें की अपेक्षा करनी चाहिए। उनका मानना है कि यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं होगा। इन लोगों का साफ कहना है कि भारत पूरी तरह से अमेरिका के साथ हो या भारत पूरी तरह से अमेरिका के खिलाफ हैं। 


भारत की कमजोरियों को अमेरिकी खूब जानतें

अमेरिकी सांसद और पत्रकार भारत की कमजोरियों को अच्छी तरह से जानतें हैं। उन्हें पता है कि चीन भारत की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। जिसका अमेरिका अच्छी तरह से फायदा उठा रहा है। अमेरीका के एक पत्रकार लाऊ डॉब्स कहते हैं कि यदि मोदी यह सोच रहें हैं कि चीन का सामना करने के उनको एक मित्र की आवश्कता है। वह आगे कहते हैं कि मोदी को कौन बताए कि रूस खुद चीन का एक रणनीतिक साझेदार है। जबकि भारत रूस सस्ता तेल खरीदने की ओर देख रहा है। इससे साफ हो रहा है कि अमेरिकी लोगों को भारत की कमजोरी और ताकत का पूरी तरह ज्ञान है। 


लेकिन यह उतना ही सच है कि अमेरीका भारत पर कभी भी प्रतिबंध नही लगाने वाला है। वो क्यों अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेगें। क्योंकि इससे भारत और अमेरिका दोनों का नुकसान होगा। इसका सीधा फायदा चीन और रूस उठायेंगे। 

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