भारत के लिए बहुत चिंता की बात, सऊदी अरब ने चीनी मुद्रा युआन में पेट्रोल बेचना शुरू किया

अमेरिका के लिए सऊदी अरब से बहुत बुरी खबर आई है। क्योंकि यूएस कभी भी तेल के व्यापार को डॉलर के मुकाबले दूसरे मुद्रा में होते हुए नहीं देख सकता है। लेकिन सऊदी अरब सरकार और वहां के राजकुमार प्रिंस मोहमंद बिन सलमान ने चीन को युआन में पेट्रोल बेचने की अनुमति दे दी है और इसके लिए उसने चीन से एक सौदा भी कर लिया। 

यूएस राष्ट्रपति बाइडेन और सऊदी प्रिंस मोहमंद बिन सलमान

अमेरिका के पेट्रोडॉलर सौदे को झटका

सऊदी अरब द्वारा चीन को युआन तेल निर्यात करना। यह अमेरिका के लिए एक बड़े झटके के समान है। क्योंकि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच सन् 1974 में एक पेट्रो डॉलर प्रणाली पर समझौता हुआ था। यह समझौता उस के अमेरीकी विदेश मामलों के सचिव हेनरी किसिंजर और सऊदी के राजा फैसल के बीच हुआ था। तब यूएस ने सऊदी अरब को डॉलर में तेल बेचने के लिए समझाया था। इस पेट्रो डॉलर प्रणाली की तीन प्रमुख गुण हैं।

1. सऊदी अरब का साम्राज्य केवल यूएस डॉलर में ही तेल का व्यापार करेगा और ओपेक देशों को भी ऐसा करने के लिए कहेगा।

2. तेल राजस्व अमेरिकी कोषागारों में पुनर्निवेश किया जाएगा (रीसाइक्लिंग) 

3. इसके बदले में, अमेरिका सऊदी अरब की पूरी तरह से सुरक्षा करेगा। क्योंकि सऊदी अरब को ईरान से बड़ा खतरा है।

यह पेट्रो डॉलर प्रणाली के दम पर ही यूएस पूरी दुनिया को डिक्टेट कर रहा है। जोकि एक बेहद शक्तिशाली प्रणाली है और  इससे अमेरिका को अथाह शक्ती प्राप्त है। अमेरिका कतई बर्दाश्त नहीं करेगा कि सऊदी अरब डॉलर के बदले चीनी युआन में तेल का व्यापार करें। हालाकि युआन में तेल निर्यात केवल चीन और सऊदी अरब के बीच ही होगा। युआन का प्रयोग दूसरे देशों के साथ सऊदी अरब तेल निर्यात में नहीं करेगा।

वॉल स्ट्रीट जर्नल का लेख

इसके चीनी युआन में तेल का व्यापार भारत के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। क्योंकि इससे चीन को अमेरिका की तरह अधिक शक्तियां प्राप्त हो जायेंगी। अगर ऐसा निकट भविष्य में रूस और सऊदी अरब के सहयोग से होता है तो यह अमेरिका के लिए एक बर्बादी लेकर आयेगा। इससे अमेरीकी डॉलर क्रैश भी हो सकता है। 

सऊदी अरब अमेरिका से नाराज़ क्यों

सऊदी अरब अमेरिका के राष्ट्रपति जोए बाइडेन से बेहद नाराज़ है। क्योंकि उन्होंने यमन युद्ध में सऊदी नेतृत्व सेना पर से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इससे सऊदी अरब और उसके मित्र देश नाराज़ हैं। उसका मानना है कि यूएस ने पेट्रो डॉलर प्रणाली में सऊदी अरब की रक्षा का वादा किया है। लेकिन यह भी है कि अभी तक सऊदी की सीमा के अंदर कोई समस्या नहीं आई है। किंतू इस सउदी अरब का कहना है कि यमन के विद्रोही सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहें हैं। इसलिए यूएस उनको खत्म करने के लिए सऊदी अरब की मदद करें और सऊदी गठबंधन सेना का समर्थन करें।

जोए बाइडेन से पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब का यमन युद्ध पर पूरा समर्थन प्राप्त था। लेकिन जोए बाइडेन के सत्ता में आ जानें से सऊदी अरब के लिए समस्याएं बढ़ गई।

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