कश्मीर फाइल्स Impact, अमेरिकन राज्य रोडलैण्ड ने स्वीकारा कि कश्मीर में हुआ पंडितों का नरसंहार

जिस नरसंहार को कांग्रेस की सरकार और हमारे देश के बुद्धिजीवियों ने युवा पीढ़ी से छुपा कर रखा था। उसका भंडाफोड़ कश्मीर फाइल्स चुन चुन कर रहीं है। इससे पहले कोई भी कश्मीरी पंडितों के बारे में बात करने को तैयार नहीं होता था। एक ऐसा माहौल बना दिया गया था कि कश्मीरी पंडितों के साथ कुछ हुआ ही नहीं था।

कश्मीर फाइल्स के निर्देशक और अभिनेता

लेकिन विवेक अग्निहोत्री सर की कश्मीर फाइल्स ने भारतीय वामपंथियों, सेक्युलर वादियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों को एक्सपोज कर दिया है। आज इसी का परिणाम है कि अमेरीका के शुद्ध लिबरल राज्य रोड आइलैंड ने कश्मीर नरसंहार को स्वीकारा व मान्यता दी।

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इस बारे में खुद कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री सर ने अपने ट्वीटर अकाउंट से बताया है कि यह ऐतिहासिक है, 32 वर्षों में पहली बार, दुनिया के किसी भी राज्य, संयुक्त राज्य अमेरिका के लोकतांत्रिक और उदार राज्य - रोड आइलैंड ने एक बहुत छोटी फिल्म के कारण आधिकारिक तौर पर कश्मीर नरसंहार को मान्यता दी है। उन्होंने आगे कहा कि सभी कृपया इसे पढ़ें और तय करें कि उत्पीड़क कौन है और किसे सजा मिलनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह NewIndia है।

अमेरीका में रोड आइलैंड एक छोटा और बेहद प्रभावशाली राज्य है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति या संघीय सरकार को किसी नरसंहार को मान्यता देनी होती है तो वह इसी रोड आइलैंड की ओर देखते हैं। रोड आइलैंड ने तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य के सम्राट द्वारा आर्मेनिया में किए गए आर्मेनियन लोगों के नरसंहार को मान्यता दी है। इसी को ध्यान में रखते हुए। वहां के राष्ट्रपति ने इसे नरसंहार के रूप स्वीकार कर लिया। इससे आप समझ सकते हैं कि रोड आइलैंड की कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को मान्यता देना बहुत बड़ी बात है।

अमेरीका में हिन्दू बहुत प्रभावशाली हैं और अब वह इसको यूनाइटेड नेशंस और अमेरिकी राष्ट्रपति तक लेकर जायेगें। ताकि पूरी दुनिया कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को मान्यता दे। जिसको 19 जनवरी 1990 को इस्लामिक आतंकवादियों और कट्टरपंथियों द्वारा अंजाम दिया गया था।

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यह बात उतनी ही सच है, जितनी पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ़ हो रहा नरसंहार है। कश्मीर तो हमारे देश का हिस्सा था। तब भी पूर्व की सरकार कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को चुप चाप होते देख रही थी। जबकि जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने 1986 में राजीव गांधी को सचेत किया था। क्योंकि कश्मीरी पंडितों के साथ तब हिंसक घटनाएं बढ़ती जा रही थी।

JKLF का मुखिया पीएम मनमोहन से मिलता था

जिस व्यक्ति ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को अंजाम दिया। वह JKLF का सरगना यासीन मलिक था। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट एक आतंकवादी संगठन है और इसका मुखिया भी एक आतंकवादी था। जिसके संबंध हाफिज सईद के साथ खुले आम थे। तब भी कांग्रेस की सरकार के दौरान यासीन मलिक को युवाओं का महीसा माना जाता था। मनमोहन सिंह से लेकर कांग्रेस के बड़े बड़े नेता उससे यारी दोस्ती निभाते फिर रहें थे।

जबकि उसका सीधा उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को भारत से अलग करना था। उसने ही 1990 में भारतीय एयरफोर्स के 4 सैनिकों को मरवाया था। जिसको उसने खुद बीबीसी के एक इंटरव्यू में स्वीकार कर रहा था। इसी पर रुबैया सईद की किडनैपिंग का आरोप लगा है। जिसका इस पर कोर्ट में मामला चल रहा है। तब भी यूपीए की सरकार ने यासीन मलिक पर कुछ भी कार्यवाई नही की। बल्कि इन सब मामलों पर चुप रही।

धारा 370 के हटने के बाद समय की धारा 360 डिग्री घूम गई

भारत में 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद कश्मीर में भारत विरोधी तत्वों के बुरे दिन शुरू हो गए थे। उनका सबसे बुरा दिन 5 अगस्त 2019 था। जब भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से संसद में धारा 370 के हटाने का ऐलान किया और जम्मू और कश्मीर को दो भागों में बांट दिया।

यासीन मलिक की JKLF को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया और खुद उसको दिल्ली की तिहाड़ जेल में डाल दिया। अब जम्मू और कश्मीर में कोई भी पत्थर बाज सैनिकों पर पत्थर फेंकते हुए नहीं दिखता है। पूरे जम्मू कश्मीर में शांति है। धारा 370 हटने से लोगों को वहां अधिकार प्राप्त हुए।


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