कश्मीरी पंडित गिरिजा टिक्कू, जिनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ, उनके शरीर के आरी से दो हिस्से कर दिए। kashmiri pandit Girija Tikku

इन दिनों देश में कुछ बुद्धिजीवी वर्ग कश्मीर फाईल्स नाम की एक फिल्म पर हाय तौबा मचाए हुए है। आप और हम यह सोच रहे हैं कि इस फ़िल्म में ऐसा क्या है। जिस पर पूरा देश बहस कर रहा है। इस फिल्म को विवेक अग्नि होत्री साहब ने बनाया है और इसमें अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पुस्कर नाथ, पल्लवी जोशी और दर्शन कुमार जैसे एक्टर शामिल हैं। इन्होंने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की सच्चाई कहानी दुनिया को जीवंत दिखाई ही है। जिसको अंजाम इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों द्वारा दिया गया था। 


कश्मीरी पंडितों पर बनी फिल्म
फिल्म का नाम कश्मीर फाइल्स
निर्देशक विवेक अग्निहोत्री
अभिनेता 1.अनुपम खेर
 2. दर्शन कुमार
 3. पुस्कर नाथ
 4. मिथुन चक्रवर्ती
 5. पल्लवी जोशी
कहानी इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों का नरसंहार
वर्ष 1990
तारीख 19 जनवरी का दिन

गिरिजा टिक्कू की कहानी 

जब कश्मीर में 1990 में इस्लामिक विद्रोह हुआ, तब कश्मीर की मस्जिदों से घोषणाएं हुईं थीं कि सभी कश्मीरी पंडित काफ़िर हैं। सभी कश्मीरी पंडित इस्लाम धर्म कबूल कर ले। यदि कोई कश्मीरी पंडित इस्लाम धर्म नहीं अपनाता है और वह यहां से पलायन करता है। तब भी वह अपनी मां बहन और बेटियों को अपने पीछे छोड़ कर जाएं।

मृत गिरिजा टिक्कू का शव

यह स्वतंत्र भारत में एक हिंदुओं का सामूहिक जातीय नरसंहार था। जिसका उद्देश्य कश्मीर से कश्मीरी पंडितों की सफाई था। एक ऐसी ही कहानी कश्मीरी पंडित गिरिजा टिक्कू  की है। जो कश्मीर छोड़ कर जम्मू में जा बसीं थी।

लेकिन वह कुछ काम से 1990 में कश्मीर आई थी। किंतू उस दिन से वह कभी भी अपने घर नहीं लौट पाईं। उनका शरीर सड़क के एक किनारे पड़ा मिला। उनके शरीर का जब डॉक्टर्स ने पोस्टमॉर्टम किया तो पता चला कि उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था, सिर्फ़ सामूहिक बलात्कार ही नहीं किया बल्कि क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ़ हुआ कि गिरीजा जब  जीवित थीं तब  उनके शरीर में एक लोहे के हथियार आरी मशीन का उपयोग किया गया और उनके शरीर एक दो हिस्से कर दिए गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह आरी एक बढ़ई की थी।

इस नरसंहार पर भारत का कोई भी मानवाधिकार कार्यकर्ता नही बोला। बॉलीवुड के अभिनेत्री और अभिनेता के मुंह पर ताले पड़ गए। भारत की सरकार एक दम चुप हो गई। भारत के वामपंथी और तथाकथित सेक्युलर लोग कमरे में दुबक गए। 

लेकिन वो कहतें हैं कि सच को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है। किंतू कभी न कभी वह सूर्य की किरण के तरह सामने आ ही जाता है।  सच को कभी भी मारा नहीं जा सकता है। क्योंकि इस दुनिया में सिर्फ सच ही जीवित रहता है। अधर्म और अन्याय कभी जीत नहीं सकतें हैं।

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