OIC सम्मेलन में चीन की घोर बेइज्जती, तुर्की ने चीनी विदेश मंत्री पर हमला बोला। जानें OIC की इस्लामिक आतंकवाद और कट्टरपंथ पर दो मुहीं बातें

आज 22 मार्च 2022 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में OIC विदेश मंत्रियों का 48वा सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें पाकिस्तान ने अपना पुराना घिसा पिटा कश्मीर और इस्लामोफोबिया का रोना रोया। इसके अलावा चीन को पाकिस्तानी OIC सम्मेलन से एक गहरा सबक मिला।


इमरान का OIC पर हमला

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने OIC पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया में कोई भी "इस्लामिक सहयोग संगठन" को गंभीरता से नहीं लेता है। सीधे तौर पर कहें तो मुस्लिम देश अब पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे और उसके भारत विरोधी दुष्प्रचार को कोई गंभीरता से नहीं लेता है। 

इमरान खान ने इस्लामोफोबिया के खतरे के बारे में भी विस्तार से ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि जो 9/11 हमले के बाद इस्लामोफोबिया तेजी से बढ रहा। क्योंकि मुस्लिम देशों ने पश्चिम द्वारा चलाए जा रहे "मुस्लिम आतंकवाद" के आख्यान का मुकाबला करने के लिए कुछ नहीं किया।  उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, हमने इसके (इस्लामोफोबिया कथन) के खिलाफ कुछ नहीं किया। मुस्लिम देशों के प्रमुखों को कुछ कदम उठाने चाहिए थे।"  उन्होंने कहा कि "इस्लामिक आतंकवाद" जैसा कुछ नहीं था और वह केवल इस्लाम ही था जो भाईचारे और शांति का धर्म था। जैसा कि पैगंबर ने 1400 साल पहले प्रचारित किया था।  उन्होंने कहा कि 'कट्टरपंथी इस्लाम' की धारणा को स्वीकार कर हर कोई इस्लाम में चरमपंथ के अस्तित्व को स्वीकार कर रहा है और इसका प्रचार प्रसार हो रहा है।


चीन OIC सम्मेलन में शामिल होकर माथा पीट रहा

पाकिस्तान ने एक शातिर चाल चली कि चीन और इस्लामिक देशों को एक साथ ले आएं। इसलिए उसने इस्लामिक सहयोग संगठन में चीनी विदेश मंत्री "वांग ही" को बुलाया। जिसमें चीनी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के कोर मुद्दों का समर्थन किया। इन पाकिस्तानी कोर मुद्दों में कश्मीर भी शामिल है। लेकिन OIC सम्मेलन में ऐसा कुछ हुआ। जिसकी चीन ने कभी उम्मीद भी न की होंगी। दरअसल तुर्की के विदेश मंत्री ने चीनी विदेश मंत्री के सामने ही उइगुर मुस्लिमों के मानवाधिकारों और नरसंहार का मुद्दा उठा दिया। जिससे चीन असमंजस में पड़ गया और सोच रहा होगा। कि इससे बढ़िया शामिल ही नहीं होते। 


OIC विफल क्यों रहा

इस्लामिक सहयोग संगठन कहने को 52 देशों और 1.5 अरब से अधिक मुस्लिम आबादी का एक महत्वपूर्ण समूह है। लेकिन आज सच्चाई भी है कि दुनिया के अन्य संगठन से ज्यादा इसमें अलगाव और बिखराव है। हर देश की अपनी एक विचारधारा और नीति है। इसके अलावा यह संगठन कट्टरपंथ और आंतकवाद पर कोई विशेष कार्यवाई नही कर सका। जबकि पाकिस्तान आतंक का स्वर्ग है। जहां बड़े बड़े आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं।


OIC तालिबान और इस्लामिक स्टेट जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोलता है। दुनिया में कहीं आतंकी घटना घटित हो तब भी OIC विरोध में एक शब्द भी नहीं बोलेगा। पाकिस्तान में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों का हो रहा नरसंहार इस्लामिक सहयोग संगठन को दिख नहीं रहा है। जबकि भारत में अल्पसंख्यकों के तथाकथित अत्याचारों को लेकर भारत के खिलाफ़ दुष्प्रचार करता है। यह संगठन मुस्लिम जगत में विज्ञान और तकनीक की बात नहीं करता है। बल्कि दूसरे गैर मुस्लिम देशों में अपनी टांगें अड़ाता है। जहां यह मुस्लिम आबादी को कट्टरपंथी बनने का समर्थन भी करता है। 

इस्लाम दो धड़ों में बंटा हुआ है। जिनको हम शिया और सुन्नी कहते हैं। इनमे इतना अधिक मतभेद और मन-भेद है कि कोई एक दूसरे के हाथों से पानी भी नहीं पीना चाहता है। उदाहरण के तौर पर,  सऊदी अरब एक सुन्नी और ईरान एक शिया बहुल देश है। लेकिन दोनों एक दूसरे के खत्म करने के लिए उतारू रहते हैं। 

इसी तरह तुर्की और सऊदी अरब की मुस्लिम उम्मा पर राज करने के लिए तलवारे खींची रहतीं हैं। तुर्की का मानना है कि जिस तरह ऑटोमन साम्राज्य के दौरान खलीफा का शासन था। जो पूरे मुस्लिम उम्मा का बाप होता था। उसको वह एक बार पुनः स्थापित करना चाहता है। लेकिन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसको अब नहीं मानते हैं। 

इसके अलावा पाकिस्तान में OIC की 48वीं विदेश मंत्रियों की बैठक पूरी तरह से विफल रही। क्योंकि इसके बहुत से महत्वपूर्ण देश शामिल ही नहीं है। ओमान के विदेश मंत्री पाकिस्तान में OIC सम्मेलन में शामिल होने ही नहीं आएं। उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड कर पाकिस्तान को भेज दिया। जबकि वह 23 मार्च को भारत की यात्रा पर दिल्ली आ रहें हैं। दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब का एक प्रतिनिधि मंडल कश्मीर में निवेश के रास्ते खोजने आया।


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