कश्मीर फाइल्स भारतीय Political History की सबसे ज्यादा चर्चा वाली फ़िल्म बन चुकी, आम जनता ही स्पॉन्सर बन गई

इन दिनों भारत में सिर्फ और सिर्फ द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir files movie) फिल्म के ही चर्चें हैं। इसके आगे दूसरी कहीं खो सी गई हों। इसका कारण 32 वर्षों से छुपाया गया कश्मीरी पंडितों का नरसंहार है। इस फ़िल्म ने भारतीय सिनेमा जगत और भारतीय लोगों के स्वाद को अलग ही रास्ता दिखा दिया। 

कश्मीर फाइल्स के निर्देशक और अभिनेत्री, अभिनेता


जब भारत की आम जनता कश्मीर फाइल्स फिल्म को देखती है तो उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है कि हमारे देश में 32 वर्ष पहले कश्मीरी पंडितों के साथ कितना घृणित कार्य हुआ था। जिसको अंजाम इस्लामिक आतंकवादियों और कट्टरपंथियों द्वारा दिया गया था।

कश्मीर फाइल्स फिल्म पर केवल आम जनता ही बात नहीं कर रही है। इस पर पहली बार भारत का राजनीतिक समाज भी बहस कर रहा है। इसे इस तरह भी कहा जा सकता है कि द कश्मीर फाइल्स भारतीय राजनीतिक इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चा वाली फ़िल्म बन चुकी है। 

आम तौर पर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी इस तरह की बहसों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन पहली बार उन्होंने किसी फिल्म का समर्थन ही नहीं किया। बल्कि इसे इतिहास की बुराई प्रकट करने का सबसे ताकतवर माध्यम बताया। उन्होंने बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में कहा कि जो लोग बोलने की स्वतंत्रता का झण्डा लेकर चलते हैं। वो पुरी जमात पिछले 4 से 5 दिनों में बौखला गई है। इस फ़िल्म की तथ्यों और सबूतों के आधार पर विवेचना करने के आधार पर, उसको बदनाम करने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाई गई। पीएम का कहना है कि जो सत्य है उसे देश की भलाई के लिए देश के सामने लाना चाहिए। एक "पारिस्थितिकी तंत्र" ने सच्चाई को दबाने का भर पूर कोशिश की। पीएम मोदी ने बीजेपी सांसदो से उन लोगों के साथ खड़े होने का आग्रह किया, जो "सच्चाई और तथ्यों को सामने ला रहे हैं। जिनको वर्षों से दबाया गया था।

"द कश्मीर फाइल्स" भारतीय संसद में

भारतीय संसद में भी विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स पर जमकर चर्चा हुईं। खासकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर ढेर सारी बातें कहीं गई। अब संसद में इस्लामिक आतंकवाद और इस्लामिक कट्टरपंथ भी बात हो रही है। जो पहले एक स्वपन लग रहा था।

बीजेपी शासित राज्यों में फिल्म टैक्स फ्री

भारत में पहली बार ऐसा हो रहा है कि भारत के बहुत सारे राज्य फिल्म को टैक्स फ्री कर रहें हों और अपने कर्मचारियों को फिल्म देखने के लिए छुट्टी दे रहें हैं। इनमें बीजेपी शासित राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे बड़े भारतीय राज्य शामिल हैं। अभी कुल 8 राज्यों ने द कश्मीर फाइल्स को टैक्स फ्री किया है और आगे चलकर इसकी संख्या बढ़ सकती है। 

500 स्क्रीन से 2000 स्क्रीन तक

कश्मीर फाइल्स फिल्म को कोई भी सिनेमा हॉल दिखाने को तैयार नहीं था। लेकिन यह आम आदमी की शक्ति ही है कि सिनेमा मालिकों को मजबूरन फिल्म दिखानी पड़ रही है। क्योंकि सिनेमा हॉल आम जनता का दबाव नही झेल सकतें हैं। जो सिनेमा हॉल फिल्म नहीं चलाना चाहतें हैं। उनको जनता ठीक कर रही है। क्योंकि लोग द कश्मीर फाइल्स को किसी भी तरह से देखना चाहते हैं। यहीं कारण है कि जो फिल्म पहले सिर्फ़ 600 स्क्रीन पर दिखाई जा रही थी। अब वह दर्शकों के उमड़ते सैलाब की वजह से 2000 स्क्रीन पर दिखाया जा रहा है। हर सिनेमा हॉल फुल है। लोगों को फिल्म के टिकट नहीं मिल रहें हैं। क्योंकि सभी  सिनेमा हॉल पहले ही बुक हो गए।

जिनके पास देखने के लिए रूपए नही हैं तो बहुत से ऐसे लोगों को फिल्म देखने के लिए टिकट दे रहे हैं। दूसरे संस्थान भी अपने कर्मचारियों को फिल्म देखने के लिए छुट्टी दे रहे। ताकि कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ है। उसका सभी को अहसास हो सकें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, द कश्मीर फाइल्स बॉक्स ऑफिस कलेक्शन जिस तरह हर दिन बढ़ रहा है। उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह फिल्म 100 से 200 करोड़ रूपए भी कमा सकती है।

बॉलीवुड में नई चिंगारी जाग उठी

कश्मीर फाइल्स सिर्फ फिल्म ही नहीं है। यह कश्मीरी पंडितों के दुखों की फ़िल्म है। इस फ़िल्म का प्रभाव बॉलीवुड पर बहुत बड़े पैमाने पर पड़ने जा रहा है। क्योंकि बॉलीवुड भारतीय जनता को सच्चाई से दूर ले गया है। जिसकी पोल कश्मीर फाइल्स फिल्म ने खोल कर रख दी। मिशन कश्मीर और हैदर जैसी बॉलीवुड फिल्में आईं। किंतू किसी में भी कश्मीरी पंडितों का जिक्र भी नहीं हुआ था। सब एक ही ताने बाने को दिखा रहे थे कि कश्मीरी अपनी आजादी के लिए लड़ रहें हैं। जबकि सच्चाई यह है कश्मीर के मूल निवासी कश्मीरी पंडित हैं। वहां आक्रमणकारियों ने हमला कर जन्नत को नरक बना दिया।

इस्लामोफोबिया

इस फ़िल्म के बहाने इस्लामोफोबिया का मुद्दा जरूर उठेगा। क्योंकि जब इस्लामिक आतंकवादियों के कुकर्म दुनिया के सामने आने लगते हैं तो उसको बचाव में बहुत सारे देश , संगठन और लोग उतर आतें हैं। जिनमें पाकिस्तान, भारत के बॉलीवुड का एक समूह और सेक्युलर लोगों का एक समूह शामिल है। भारतीय सेक्युलर लोग कहते हैं कि 32 वर्षों पुराना मुद्दा क्यों देश के लोगों को दिखा रहे हो। भूलो और आगे बढ़ों। इस तरह की बातें होती हैं। लेकिन गुजरात 2002 के दंगे सभी सेक्युलर लोगों को याद रहतें हैं। इन पर कोई नहीं कहता है कि 2002 के गुजरात दंगो को भूलो और आगे बढ़ो।

इसी तरह की भारत में द कश्मीर फाइल्स पर बहसें छिड़ी हुई हैं। खास कर सोशल मीडिया नए जमाने का युद्ध का मैदान बना हुआ है।

Post a Comment

Previous Post Next Post