रूपए के लिए सही समय रूस में ग्रैंड प्रवेश करने का। अमेरिका फर्म वीजा इंक और मास्टरकार्ड ने रूस में सेवाओं को निलंबित किया। World and Indian Affairs

अमेरीकी फर्म का रूस सेवाओं का निलंबन

जब से रूस ने यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान की कार्यवाई शुरू की है, तब से अमेरिका की वित्तीय सेवाप्रदाता कंपनियों ने रूस में अंतरराष्ट्रीय सेवाओं का निलंबन कर दिया।

यूएस भुगतान फर्म वीजा इंक और मास्टरकार्ड इंक ने रूस में अपनी सेवाओं के परिचालन पर रोक लगा दी और वे वहां सभी लेनदेन को रोकने के लिए कार्य करेंगे।  इन सभी कंपनियों के अनुसार, रूस में जारी किए गए कार्ड से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन देन नहीं किया जा सकता है। इसी के साथ रूस से बाहर जारी किए कार्ड भी रूस में काम नहीं करेंगे।

अमेरीकी फर्म वीजा के अधिकारी अल केली ने अपने बयान में कहा,"रूस का यूक्रेन पर अकारण आक्रमण और स्वीकार्य न की जानें वाली घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के लिए मजबूर हैं।"

यूक्रेन के केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष का पूर्व बयान

रूस में वीजा और मास्टरकार्ड की सेवाओं का निलंबन, यूक्रेन के केंद्रीय बैंक के प्रमुख कायरलो शेवचेंको ने निक्केई एशिया की केंद्रीय बैंक को इस बारे में बताया था। इसी से ज़ेलेंस्की ने इन सभी कंपनियों से रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए जारी किए गए अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड के लेनदेन को रोकने का आग्रह किया। पेपाल होल्डिंग्स इंक (पीवाईपीएल.ओ) ने भी  इससे पहले रूस में अपनी सेवाओं की रोक पर अपने फैसले की घोषणा की।

बाइडेन और वलोडिमिर ज़ेलेंस्की

व्हाइट हाउस ने वीजा और मास्टरकार्ड की कार्यबायो पर कहा कि अमेरीकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक फोन कॉल पर वीजा और मास्टरकार्ड के रूस में अपने संचालन को निलंबित करने के फैसले का स्वागत किया। "यूएस राष्ट्रपति बाइडेन ने बताया कि उनका प्रशासन यूक्रेन को सुरक्षा उपकरण, मानवीय और आर्थिक सहायता मुहैया करायेगा"

इन भुगतान फर्मों के निर्णयों से रूसी नागरिकों की समस्याएं बढ़ने वाली हैं। क्योंकि वह पहले से ही बढ़ती मुद्रास्फीति, आर्थिक कठिनाई और आयातित सामानों के आयात से जूझ रहें हैं। इस निर्णय से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। 

अमेरीका और पश्चिमी देशों ने रूस पर अभूतपूर्व आर्थिक प्रतिबंध लगाएं हैं, जिससे रूस की केंद्रीय बैंक की 640 अरब डॉलर की संपति में से अधिकांश पर रोक लग चुकी है। रूस पर दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिबंध लगाया गया। जिसको दुनिया स्विफ्ट सिस्टम के नाम से जानती है, वास्ताव में, यह एक वैश्विक भुगतान प्रणाली है। जिसकी मदद से दुनिया में कहीं से भी भुगतान किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का रूस के खिलाफ़ युद्ध

रूस ने कभी यह नहीं सोचा था कि कोई अंतरराष्ट्रीय कंपनी   उनका बहिष्कार करेगी। लेकिन इन वैश्विक कंपनियों का बहिष्कार रूसी जनता पर बहुत भारी पड़ने वाला है। क्योंकि एप्पल आईफोन आईपैड निर्माता कंपनी, दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग लाइन कंपनी MSC और Maersk ने रूस से आने वाले कंटेनर शिपिंग को निलंबित कर दिया था।  इसके अलावा विश्व की सबसे बड़ी हवाई जहाज निर्माता कंपनी बोइंग और एयरबस ने रूस की एयरलाइंस को कलपुर्जों की आपूर्ति को रोक दिया। इनके अलावा फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और दूसरी समाचार एजेंसी रूस का बहिष्कार कर रहीं हैं। जिससे आम रूसी लोगों को दुनिया से कट जाने का डर सता रहा है। क्योंकि उन्होंने कभी भी उत्तर कोरिया और ईरान के लोगों की तरह जिंदगी नहीं जी है।

रूस में बैंकों और एटीएम की भारी भीड़

जिस तरह अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाएं हैं। उससे रूस की आम जनता के अंदर खौफ पैदा हो गया। क्योंकि उनको अपनी गाढ़ी कमाई खो जानें का डर सता रहा। जिस तरह से रूस को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर किया गया और उसके 640 अरब डॉलर के अधिकतर विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया है। इसी का प्रभाव रूस की मुद्रा रूबल पर पड़ रहा, रूस की मुद्रा 135 रूबल प्रति 1 डॉलर तक पहुंच गया। 

रूस में बैंक और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। क्योंकि लोगों को डर है कि कहीं कोई बैंक डूब न जाए। इसको देखते हुए रूस की केन्द्रीय बैंक ने अपनी ब्याज दरों को 9% से बढ़ाकर सीधे 20% कर दिया है। स्विफ्ट सिस्टम से बाहर हो जाने के कारण रूस के बैंक और एटीएमएस अब डॉलर और यूरो में लेन देन नहीं कर सकते हैं। यहीं कारण है कि रूस के बैंक यूरो और डॉलर की मुद्रा को नहीं दे रहे हैं। रूस की सरकार ने विदेशी मुद्रा को देश से बाहर ले जाने पर रोक ल

कई दिनों तक, रूस के चारों ओर एटीएमएस के पास लंबी लाइनें लगीं क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग में खराबी की आशंका के बीच लोग नकदी निकालने के लिए दौड़ पड़े - विदेशी मुद्रा और रूबल दोनों।  रूसी सेंट्रल बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को दोगुना से अधिक 20% कर दिया।  मॉस्को के बैंक और एटीएमएस अब यूरो और डॉलर नहीं दे रहे थे।  वे कम आपूर्ति में रहते हैं।  क्रेमलिन ने बदले में सभी रूसियों को विदेशों में विदेशी मुद्रा स्थानांतरित करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

रूस में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की भारी कमी

रूस की आम जनता की समस्याएं सिर्फ़ आर्थिक तौर पर ही नहीं खत्म हो रहीं हैं। बल्कि रूसी लोगों को विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों की कमी पड़ने वाली है। हालाकि यह भी सच्चाई है कि रूस ने पिछले प्रतिबंधों से फायदा उठाया है और अपनी एक घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया। किंतू रूस तकनीक, दवा और दूसरे महत्वपूर्ण वस्तुओं पर आयात पर निर्भर है। भविष्य में इनकी कीमतों को लेकर अनिश्चितता है।  इसी से रूसी नागरीक इनको स्टोर करने पर लगे हैं।

मास्टरकार्ड और वीज़ा

यूएस की मास्टरकार्ड और वीज़ा जैसे दो महत्वपूर्ण कंपनियों का अच्छा खासा व्यवसाय था।  मास्टरकार्ड अपने   शुद्ध राजस्व का लगभग 4% रूस के भीतर और बाहर किए गए व्यवसाय से प्राप्त हुआ था। जोकि एक बहुत बड़ा आंकड़ा होता है।

इसी प्रकार वीज़ा ने 2021 में रूस से कुल शुद्ध राजस्व उसके कुल राजस्व का लगभग 4% था। 

मास्टरकार्ड और वीज़ा का घरेलू स्तर पर उपयोग जारी

 रूस के सबसे बड़े ऋणदाता Sberbank Rossii PAO (SBER.MM) ने कहा, "ये दोनों कार्ड रस में जारी हुए कार्ड के उपयोगकर्ताओं को प्रभावित नहीं करेगा। क्योंकि ये कार्ड घरेलू स्तर पर रूपयों को निकालने, स्थानान्तरण करने, ऑफ़लाइन स्टोर और रूसी इंटरनेट स्टोर में भुगतान करने में सक्षम होंगे। रूस में लेनदेन घरेलू राष्ट्रीय भुगतान कार्ड प्रणाली से होकर गुजरता है, जो विदेशी भुगतान प्रणालियों पर निर्भर नहीं करता है।

क्रीमिया विजय के बाद रूस का स्वभाव

रूस ने  2014 में क्रीमिया जीत लिया था, जिसके बदले में रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाएं गए।। इसी बीच रुस ने खुद को वर्षों से अपनी वित्तीय प्रणाली की स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा था। रूस ने खुद की बैंकिंग संदेश प्रणाली मजबूत करने का प्रयास किया। जिसको हम एसपीएफएस के रूप में जानते हैं। रूस ने यूएस और पश्चिमी देशों के स्विफ्ट के खिलाफ़ अपनी कार्ड भुगतान प्रणाली एमआईआर ने 2015  में लेकर आया। जिससे रूस की आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर सकें।

भारत के रूपए और यूपीआई के लिए एक अवसर

भारत का रूपए और यूपीआई सिस्टम भारत की 60% लेन देन को कवर करते हैं। इनसे आसानी से पैसों को एक जगह से दूसरी जगहों पर आसानी से भेजा जा सकता है। मास्टरकार्ड और वीज़ा द्वारा रूस का बहिष्कार करना, यह भारत के रूपए और यूपीआई के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो सकता है।

हालाकि यह भी सच्चाई है कि भारत को इस समय रूपए और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस की पेशकश रूस को नहीं देनी चाहिए। क्योंकि इससे यूएस और पश्चिमी देश नाराज़ हो सकतें हैं। 

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