कपालभाति प्राणायाम करने की विधि, हानि और लाभ। साइनस के लिए योग , योग द्वारा हर्निया का इलाज

कपालभाती प्राणायाम 

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाती प्राणायाम करने की विधि

1.सबसे पहले ध्यान मुद्रा में जमीन पर बैठें।

2. आंखों को बंद करें और शरीर को शिथिल (relax) करें।

3. अब अपनी नासिका छिद्रों से अंदर की ओर तेज हवा ले।

4. अपने सीने को फुलाएं।

6. आगे अब हवा को पेट की मांसपेशी के बल से तेजी से बाहर निकालें और शरीर को आराम अवस्था में लायें।

7. कोई शीघ्रता या तनाव न करें।

8. अब हवा को अंदर (Inhalation) और बाहर (Exhalation) करने की यह क्रिया लगातार करते रहें।

9. यह क्रिया कम से कम 35 बार करनी चाहिए।

10. अब आखिरी बार गहरी सांस लो और सांस को धीरे धीरे छोड़ों।

11. योग को हमेशा समतल स्थान और एक अच्छी योग चटाई पर करना चाहिए। योग करने के लिए चटाई न हो तो किसी दूसरी आरामदायक वस्तु का प्रयोग करें।

ध्यान दें: 

1.कपालभाती प्राणायाम को करते समय गहरी सांस लेनी चाहिए। 
2.कम से कम 2 राउंड कपालभाती प्राणायाम के करने चाहिए।

कपालभाती योग इस तरह के लोग करने से बचें।

1. उच्च रक्तचाप (High blood pressure)

2. नासिका से खून निकलने पर (Nose bleeding)

3. हृदय के मरीज (Heart Patients)

4. चक्कर(Giddiness) आने वाले लोगों को इस योग से बचना चाहिए।

5. पेट के अल्सर से पीड़ित मरीजों को इसे नहीं करना चाहिए। क्यों कि जब इसको करतें हैं तब पेट की मासपेशियों पर दबाव पड़ता है तब अल्सर की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

 6. मासिक धर्म (Menstrual cycle) के दौरान महिलाओं को भी इसे करने से बचना चाहिए और गर्वभति महिलाओं को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

कपालभाती प्राणायाम के प्रमुख लाभ।

1. रक्त प्रवाह (Good Blood Circulation) अच्छा होता है। 

2. शरीर में स्फूर्ति (Active) आती है और थकान (Fatigue) कम आती।  

3. चहरें की झुरियां (Face Black Wrinkles ) कम होती हैं।

4. मेटाबॉलिज्म (Metabolism) ठीक होता हैं और पाचन तंत्र (Digestive system)में सुधार होता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post